राष्ट्रीय योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए जनता का नैतिक समर्थन जरूरी



जैतपुर के पीएस हरपारा महिला कालेज में प्रिन्सिपल डॉ. की बी कुंभादी की अध्यक्षता में एक सेमीनार का आयोजन किया। सेमीनार में सभी संकाय के 2000 विद्द्यार्थीयों एवं शिक्षण स्टाफ ने भाग लिया। परमाणु सहेली डॉ. नीलम ने बताया कि भारत की चार बड़ी योजनाएं हैं- भारत की सभी नदियों का अन्तर्सम्बन्ध, भारत में प्रतिवर्ष, औसतन, 5000 यूनिट प्रति-व्यक्ति समग्र विद्ध्युत का उत्पादन, भारत में गाँवो से शहरों को राजधानियों से जोड़ते हुए राज मार्गों की स्थिर व विश्वसनीय व्यवस्था तथा भारत की समग्र उपजाऊ भूमि 1600 लाख हेक्टेयर पर भूमालिक उत्कृष्ट कृषि प्रबंधन।

हमारी प्राकृतिक सम्पदाएँ, योग्यताएं व आवश्यकताओं को मद्देनजर रखते हुए एवं एक सच्चे व सतत विकास के लिए ही तो- हमारे भविष्यदृष्टाओं, योजनाकारों, वैज्ञानिकों, इंजीनियरों एवं विभिन्न सम्बंधित सरकारी-गैर सरकारी एजेंसियों ने- ये चार योजनाएं क्रियान्वयन हेतु ही बनाई थी, न कि, किसी भी प्रकार के अवरोध के चलते इन्हे डंप कर देने या कछुए की गति से सिर्फ रेंगते रहने के लिए।

यदि ये चार योजनाएं समयान्तर्गत सफलतापूर्वक क्रियान्वित हो रही होती तो आज भारत की प्रतिव्यक्ति औसत आय 9 से 15 लाख रूपये के बीच होती। भारत का स्थान विकसित देशों में शीर्ष पर होता।

हमारे चतुर पड़ौसी देश चायना में नदियों-नहरों-जलाशयों से सम्बंधित, लार्ज कृषि फ़ार्म से सम्बंधित और परमाणु ऊर्जा से सम्बंधित सभी योजनाओं का समयान्तर्गत सफलतापूर्वक क्रियान्वयन हो रहा है, जिसके फलस्वरूप चायना की प्रतिव्यक्ति बिजली उपभोग क्षमता एवं प्रतिव्यक्ति आय क्रमश 5000 यूनिट एवं 7 लाख रूपये हो गयी है। इधर, भारत की प्रतिव्यक्ति बिजली उपभोग क्षमता एवं प्रतिव्यक्ति आय क्रमश 865 यूनिट एवं 86500 रूपये मात्र हैं।

परमाणु सहेली ने बताया कि क्या कारण है- -कि भारत सब कुछ होते हुए व चाहते हुए भी अपनी इन महत्वपूर्ण योजनाओं का पूरी तरह से सफलता पूर्वक क्रियान्वयन नहीं करा पा रहा है, भारत अपने ही गृह में आरक्षण, जातिवाद, हिन्दू-मुस्लिम, मंदिर-मस्जिद और महा भ्रष्टाचार जैसे दलदल में दिनों-दिन फंसता ही जा रहा है, आतंकवाद की वेदी पर भारत के लाडले सपूतों की जान इतनी सस्ती हो चुकी है? ऐसा ही चलता रहा तो, निकट भविष्य में, भारत अपने ही गृह में एक अनियंत्रित भयानक खूनी आक्रोश को झेलेगा, तब इसकी जिम्मेदारी किसके माथे मंढी जाएगी? परमाणु सहेली ने कहा कि इन सभी प्रश्नों का एक ही उत्तर है- "अज्ञानता" प्रजातांत्रिक भारत की आम से लेकर ख़ास जनता अपने ही चहुँतरफा सच्चे व सतत विकास की चारों महत्वपूर्ण योजनाओं के सन्दर्भ में वास्तविक संसार के ज्ञान से अनजान है। यही अज्ञानी जनता अपनी इन योजनाओं का मरने मारने के स्तर का विरोध करती रही है, जिसके फलस्वरूप ये योजनाएं हासिये पर चली जाती रही है या फिर कछुए की गति से धीमी गति से बढ़ पा रही है। भारत के सच्चे सतत विकास के मुख्य अवरोध "अज्ञानता" को मॉस स्तर पर जड़ से ही समाप्त करने हेतु परमाणु सहेली ने, प्रथमया दृष्टि में, दो राज्यों- "राजस्थान व गुजरात" को चुना है। इन राज्यों के दो-दो करोड़ ग्रामीण वयस्कों को रूबरू जागरूक कर देने की रणनीति बनाई है। इनमें ग्रामीण युवाओं की जागरूक टीम ही कार्य करेंगी और एक वर्ष के अंदर 2 करोड़ वयस्कों को जागरूक कर उन सबका नैतिक समर्थन पत्र प्राप्त करेगी। कालेज के स्टाफ सहित सभी विद्यार्थियों ने परमाणु सहेली के साथ शपथ ली कि जल-कृषि-ऊर्जा से समबन्धित राष्ट्रीय योजनाओं का पूर्ण नैतिक समर्थन करेंगे।

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